टूटने से जब खुद को बचाने लगी

शिर्षक:- टूटने से जब खुद को बचाने लगी टूटने से जब खुद को बचाने लगी, हजार मुश्किलें राहों में आने लगी... कदम जब उठ पड़े खुद को अडिग बनाने को, ये मुश्किलें भी…

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बसंत की आहट

अलौकिक आनंद अनोखी छटा ॥ अब बसंत ऋतू आयी है ॥ कलिया मुस्काती हंसी उड़ाती ॥ पुरवा पंख डोलायी है ॥ महक उड़ी है चहके चिड़िया ॥ भवरे मतवाले मडरा रहे है ॥…

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राष्ट्रहित

अजीब ये इत्तेफाक है बहुतो को ये पता भी नही बयान उनका देश हित में है या देश के खिलाफ है गजब की ये राजनीती है गजब का ये सत्ता मोह है जाने…

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