वो रामगढ़ था ये लालगढ़ …!!

वो रामगढ़ था ये लालगढ़ ....!! तारकेश कुमार ओझा यादों के जनरल स्टोर में कुछ स्मृतियां स्पैम फोल्डर में पड़े रह कर समय के साथ अपने - आप डिलीट हो जाती है ,…

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समय की पृष्ठभूमि पे

तेरी मेरी दोस्ती कायनात के रंग समुन्दर की लहरें यह किनारा, पहाड़ी और पेड़ ठंडी ठंडी सरसराती हवा एक बच्चों का खेल एक बड़ों का खेल समुन्दर किनारे कुछ लोग खड़े, कुछ बैठे,…

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व्यथा जीवन की

एक तन है एक मन है एक आत्मा है तीनों में बंधन है कुछ पलों के तो सम्बन्ध विच्छेद है एक लंबे समय के लिए एक बार बिछड़कर यह फिर कभी नहीं मिलते…

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प्रेम करे क्या!

असहमत भी होकर हैं सहमत करें क्या किसी से किसी की शिकायत करें क्या तेरे दर्द की और खिदमत करें क्या न होती अब हमसे हिफाजत करें क्या तुझे दिल दुखाने की आदत…

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न सागर न आसमान

आसमानी वस्त्र शरीर पर धारण कर न तो मैं सागर बन पा रही हूं और न ही आसमान समुन्दर किनारे बैठी हूं उसकी रेत में सिर गढ़ाये उसके जल में देख रही हूं…

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प्यार के मौसम

हरियाली की चितवन और आसमानी चिलमन दूर दूर होकर भी पास हैं एक हैं यह दूर से जीते हैं एक दूसरे को तकते हुए कभी अपनी जगह नहीं बदलते जहां खड़े हैं वहां…

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पाताल लोक – एक समीक्षा

पाताल-लोक नाम सुनकर ही जाहिर है कि पाताल-लोक किसी ऐसे परिवेष की कहानी है जहाॅ इंसान की जिन्दगी की घुणित तस्वीर दिखायी देती है। जहाॅ मेहनत का फल मीठा नहीं और रिष्तों का…

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जीवन का सागर

तुम मेरा हाथ थामो और मैं थामती हूं तुम्हारा एक दूसरे का हौसला बढ़ाते एक दूसरे को सांत्वना देते एक दूसरे को निश्छल भाव से प्रेम करते एक दूसरे के मन को समझते…

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मैं कली से बना एक फूल

मैं कली से बना एक फूल अपना मुख देखूं दर्पण में तो भौरे की गुंजन का सुनु गीत कल कल नदी बह रही सर सर हवा चल रही ठंडी है गर्म भी एक…

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रावलपिन्डी

चालीस वर्ष पूर्व मेरे कॉलेज के दिनो में मेरे मित्र ने मुझे अपने परिवार के साथ घटी इस दर्दनाक, अमानवीय पीड़ा से ग्रस्त और व्यथित कर देने वाली कहानी सुनाई थी, इस आग्रह…

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दुखिया का दुख

. बस्ती का दुखिया दिहाड़ीदार मजदूर है, आर्थिक तौर पर वो लाचार मजबूर है, उसकी पत्नी जो सालों से बीमार है, ऊपर से रूढ़िवादी रिवाजों की मार है, उसके घर उसकी एक बेटी…

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बदनाम भूत बंगले का रहस्य

बदनाम भूत बंगले का रहस्य राकेश अपने बैंक की नई ब्रांच में में ज्वाइन करने के लिए जब माधवपुरा रेलवे स्टेशन पर उतरा तो रात के आठ बज चुके थे, ट्रैन अपने समय से पांच…

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उपासना पद्दति और धर्म

मनुष्य केवल विज्ञान के आधार पर जीवन जीने वाला प्राणी नहीं है। इस कारण वह मानव जीवन के विविध आयामों के मध्य मनुष्यता के सामने आयी विभिन्न चुनौतियों या समस्याओं का समाधान खोजने…

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हाय रे मजदूर जीवन ( कविता)

हाय रे मजदूर जीवन ,तेरी यही कहानी , भूखा प्यासा तन और आँखों में है पानी । विकास का पहिया चले देश का तेरे दम पर , इस भाग्य विधाता की किसी क्द्र…

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