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Sep 30, 2017
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अबला नारी

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मैं एक अबला नारी मां
शरण तेरी मैं रहती हूँ
कभी वृंदावन कभी गोकुल
भिक्षा मांगा करती हूँ
अक्श मेरे झर-झर बहते
अभिप्राय नहीं आकांक्षा नहीं
मनोरथ तू ही मेरी माता
कैसे निवारण कष्ट करूं
बहुत दीन एक पयस्विनी हूँ
मैं एक अबला नारी मां

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Article Categories:
कविता

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