अभागिन

By | 2017-12-18T20:56:33+00:00 December 18th, 2017|कहानी|0 Comments

इस कहानी को आप सबने बहुत पसंद किया आभार आपका। लेकिन शायद पूरा दर्द जो हमारी महिलाओं को होता है वह कसक शब्दों में नहीं उतार पायी जो महसूस करती हूं अगर आप में से कोई उस दर्द को शब्दों में उतारेगा मुझे बहुत खुशी होगी।।

मैं अपनी छोटी बहिन की शादी में आयी हुई थी। वहां जाकर पता चला मेरी सहेली जो मुझे अति प्रिय थी उसके पति अचानक सड़क दुर्घटना में चल बसे, मैं दुखद भरी घटना सुनकर सम्भल नहीं पा रही थी उससे मिलने जाना था। मां ने मना कर दिया जबतक तुम्हारी बहिन की शादी नहीं हो जाती तुम उससे मिलने नहीं जा सकती। मन विचलित हो गया था क्या करती शादी तक इंतजार करना पड़ा।।
बहिन के विदा होने के बाद मां से कह कर अपनी सहेली से मिलने पहुंच गई वहाँ जाकर देखती हूँ मेरी सहेली विभा की हालत बहुत खराब है उसकी चांदी सी चमकती काया काली पड़ चुकी थी उदास और खोयी सी दिखाई दी, जैसे ही विभा ने मुझे देखा फूट फूट कर रोने लगी। और मुझसे कहने लगी मेरी जिंदगी कैसे कटेगी मैं बर्बाद हो गई हूं। उसे रोता देख मैं भी अपने आप को रोक नहीं पाई मैं भी फूट फूट कर रोने लगी, विभा कहने लगी अब मैं क्या करूंगी, मैंने उससे कहा नौकरी करने लगो जिससे तुम्हारा समय भी कटेगा अपना जीवन अपनी तरह जी सकोगी पढ़ी लिखी हो हिम्मत रखो और आगे बढ़ो। विभा मुझसे कहने लगी मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी शादीशुदा औरतें मुझे छूने से डरती हैं हर शुभ कार्य में मुझे अपशकुनी माना जाता है सभी मुझसे दूर भाग जाते हैं मैंने उससे कहा इन परिस्थितियों से तुम्हें निकलना है और अपनी तरह जिंदगी जीनी है।।
विभा से ऐसा कहकर मैं घर आ गई। और फिर अपनी ससुराल आ गयी अपने घर आकर घर परिवार में व्यस्त हो गयी दो साल तक मां के घर नहीं जा पायी इसलिए अपनी सहेली विभा के बारे में नहीं जान पायी। लेकिन अब घर जा रही हूँ घर पहुंच कर मां से विभा के बारे में पूछा विभा के क्या हाल चाल हैं मां कहने लगी उसकी शादी हो गई है उसके माता पिता ने उसकी शादी गलत जगह कर दी पति भी बेरोजगार है और ऐसा कोई ऐब नहीं जो उसके पति में न हो। अपनी जिंदगी घुट घुट कर जी रही है उसे देखकर ऐसा लगता है दिमाग से शून्य हो गई है। ऐसा लगता है जिंदगी से समझौता कर लिया है
मैंने मां से कहा पढ़ी लिखी थी अपने हक के लिए लड़ सकती आखिर उसने ऐसा क्यों किया।।
मैं विभा के मां बाप से मिलने चल दी, वहां पहुंच कर कर उसके माता-पिता से कहने लगी आपने ऐसा क्यों किया उसको नौकरी क्यों नहीं करने दी आपकी बेटी पढ़ी-लिखी थी अपने लिए लड़का अपनी पसंद से चुन सकती थी, आपकी देखभाल कर सकती थी। पिता बोले बेटा मैं बुढ़ा हो चुका हूँ हम दोनों मुश्किल से अपना खर्चा चलाते हैं और उसके भाई भाभी नहीं चाहते थे कि वह यहाँ रहे हम बेबस थे क्या करते हम उसकी शादी नहीं रोक पाए।।
मैं अपने घर जा रही थी और बहुत दुखी एवं व्यथित भी
मेरी सहेली अपने जीवन का निर्णय क्यों नहीं ले पायी विभा को जीते जी मार दिया हमारे देश में औरत आजाद क्यों नहीं, क्यों नहीं जी सकती अपनी मर्जी से आखिर क्यों।।

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