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Sep 18, 2017
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आँसू

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आँसू
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न कीई वादा मगर,कहो आओ
इन पलकों को भी रहने दो
अब ना भिंगाओ,,,,,,,

 

 

सुनी है
सुना-सुना सा आँगन
इन पलकों को रहने दो
अब ना भिंगाओ,,,,,,,,,

 

हमसे कियु हो ख़फा तुम
इन रात की कालीन भी पुछे आकर
कियु उदास से रहते हो तुम
कभी तो देखो मेरे मन को बदलकर,,,,

 

 

किया मिला तुम्हें रुलाकर
इन ख़ामोश वादियों को
किया मांगते हो तसल्ली
कभी तो मुस्कुराओं मेरे
मुस्कान को पाकर,,,,,

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कविता
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मु.जुबेर हुसैन बी.एस.सी (पॉर्ट-1 ,appearing) एस.बी.एस.एस.पी.एस. जनजातिय महाविद्यालय, पथरगामा गोड्डा,झारखण्ड,814147

Comments to आँसू

  • बेहद मार्मिक

    Rating: 1.0. From 1 vote. Show votes.
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    Onika Setia September 26, 2017 12:55 pm
  • thanks.. onika setia ji

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    मु. जुबेर हुसैन October 13, 2017 8:40 am

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