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Aug 17, 2017
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आली मैं तो बाबरी हो गई

Written by

नीरजा शर्मा
आंचल मेरा उड़ उड़ जाए जुल्फें भी न सम्भलें
क्रष्ण प्रेम की मैं दिवानी लोग पगली पगली बोलें
आली मैं तो बाबरी हो गई आली बाबरी हो गई

पलकें मेरी झुकी हुई थीं नींद नहीं अंखियों में
मोहन मुरली मधुर बजावे खो गई उनकी धुन में
आली मैं तो बाबरी हो गई आली बाबरी हो गई

छोड़ छाड़ मैं भाग रही थी बेसुध सी मधुवन में
क्रष्ण के आगे भीर लगी थी क्रष्ण देख देख मुसकाये
आली मैं तो बाबरी हो गई आली बाबरी हो गई

यमुनातट पर क्षीर क्षरण कर मंद मंद मुस्काते
हाथ जोड़ती सारी गोपी न कान्हा किसी सुनते
आली मैं तो बाबरी हो गई आली बाबरी हो

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Article Categories:
कहानी

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