इंतजार

By | 2017-10-15T21:24:13+00:00 October 15th, 2017|कविता|0 Comments

मुझे याद हैं मैं अपनी “कविता ” का इंतजार किया था
वो रात का पहर में दिल बेकरार किया था ,

मै भी दिल का हाल कहने को था आतुर
फिर “कविता ” ने मुझे कलम दिया था ,

थी बिकरारी ऐसा मेरे दिल में
सब अपने दिल का हाल उसी कलम से लिख दिया था

बात सच थी मै मुहब्बत करता था दिल ही दिल में
फिर भी लब से कहने से डर रहा था

दिल का चैन खो गया था कही उनके लिये
जिनको दिल में बसा लिया था

बात हुई जब पहली बार उनसे 17जुलाई को
बस उसी के सहारे जिन्दगी गुजारने का सोच लिया था

अपने बारे में ही सबकुछ सच बता रही थी वो
दिल में ऐसा दर्द हुआ दिल तिलमिला गया था

उस रात अाँखो से निन्द कोसो दूर था
मैं अपनी खुशी उनकी खुशी में ढूंढने लगा था

मन ही मन उसे अपना कहने लगा था
शिव पार्वती का प्रेम का व्योह होने लगा था

लिया गुलाब का फूल और भेज दिया उनके इनबोक्स में
जब उसने हाँ कही तब दिल को शुकुन हुआ था

रोशन “चित्तरंजन/ममता खण्डेलवाल “

No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment