इकरार-ऐ-मुहोबत

By | 2018-01-10T14:05:52+00:00 January 10th, 2018|गीत-ग़ज़ल|0 Comments

 

यूँ तो गुजरने को गुज़र जाती है ज़िदगी

मगर वोह बात कहाँ जो तेरे पहलु में है.

दुनिया की मुहोबत बेशक हो साथ मगर,

मगर सच्चा इकरार तो तेरे साथ है.

दौलत हो ,इज्ज़त हो या बेशकीमत खजाने,

तेरे सामने यह सब फ़िज़ूल ,बेनूर है.

वैसे तो वादे-सबा आती है लेकर महक हर सु,

मगर तेरे दामन की खुशबु की बात ही कुछ और है.

मेरे महबूब ! मुझे रहती है सदा आरजू तेरी,

मेरी हसरतो की दुनिया सिर्फ तू ही तू है.

 

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संक्षिप्त परिचय नाम — सौ .ओनिका सेतिया “अनु’ , शिक्षा — स्नातकोत्तर विधा — ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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