इच्छाएं

By | 2017-10-26T10:34:13+00:00 October 26th, 2017|कविता|0 Comments

इच्छाएं
एक इच्छा पूर्ण हुई
दूसरी जग उठी
न इच्छाओं का अंत
सृष्टि की रचियता ये
संसार की उत्पत्ति है
कोई भी कर्म यहां
इच्छा के बिना अपूर्ण है
बड़े बड़े महारथी न
इच्छाओं को मार सके
संकल्प सहित इच्छाएं
जग में विराजमान है
हमने यहाँ जन्म लिया
ये भी एक कर्म है
इच्छाओं के बिना यहां
कहां जीवन मरण है
महाभारत जैसे युध्द हुए
ये भी तो इच्छाएं थी
राज्य एक लालसा
दुर्योधन की इच्छा थी
रामायण रची गई
रचेताओं की इच्छा थी
इच्छाओं को बांध सके
न कोई ऐसा कर सका
बड़े बड़े ऋषि यहां
इसके आगे झुक गये
भाई दौज की आप सभी को मेरी बहुत बहुत शुभकामनायें।।
सुप्रभात। आज का दिन सभी का मंगलमय हो

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