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Sep 30, 2017
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एक दर्द

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तूफानों का शोर हुआ
मन में एक पीर उठी
तारा कोई एक खोया
ढुढें से वो न मिला
वो देखो पंक्षी उड़ा
हाथ से छूट गया
ये मंजर था बुरा
जीना आसान नहीं
चमक अंधेरे में दिखी
कोई साया था वहां
कल की परछाई लिए
जिन्दगी का असूल वहां
उसको भूलें भी भला
तूफानों का शोर हुआ

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कविता

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