कन्या ब्याह

By | 2017-12-22T19:51:18+00:00 December 22nd, 2017|कविता|0 Comments

विधा- चौपाई

मनहर माया मद मन मोहे , मंगल रस जीवन भर सोहे ।।
लक्ष्मी सी जब बहु घर आवे, बिन लक्ष्मी तब मन दुख पावे ।।
कन्या ब्याह बाप दुख जागे ,लालच डूबा वर धन मांगे।।
लोभ राग की माया नगरी , नारी का जीवन दुख गगरी ।।
देख तराजू तुलता पलडे , लोभ सदा से देता   झगड़े ।।
ख्याल भिखारी आता मन में , लालच डूबा दूल्हा धन में।।
तृष्णा चाहे थोक कमाई , मानवता तज धन ललचाई ।।
सुनो गुनो समझो नर नारी, लोभ राग जीवन मत हारी ।।

छगन लाल गर्ग विज्ञ ।

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