नमस्कार!   रचनाएँ जमा करने के लिए Login करें कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ · हिन्दी लेखक डॉट कॉम
Oct 24, 2017
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कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ

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कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
तुझको ही खुआव बनाकर के हर पल जीता मरता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
बिन तेरे न जी सकता मै एक पल बिन तेरे मै हर पल मरता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
जो लम्हे है तेरे साथ बिताये उन्हें सोच तड़पता रहता हूँ
मुझे मालूम है कि तू न समझेगी मै खुद को ही मनाता रहता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
बिन तेरे न जी सकता मै एक पल बिन तेरे मै हर पल मरता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
बिन तेरे न जी सकता मै एक पल बिन तेरे मै हर पल मरता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ
कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ

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Comments to कर न मोह्हबत तू मुझसे मै तुझसे ही मोह्हबत करता हूँ

  • बात बिगड़ने में वक़्त नहीँ लगता
    सँवरने-सँवारने में ज़माने लग जाते हैँ..

    नीँव के पत्थर गर वेवफ़ा हो जायें
    तो
    मंज़िल बनाने को ज़माने लग जाते हैँ.!”

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    सुबोध October 27, 2017 10:01 am
  • एकदम सही का सुबोध जी

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    ABHISHEK YADAV October 27, 2017 9:30 pm

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