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Nov 14, 2017
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काले हैं दिलवाले

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काले है दिलवाले गोरे रंग दफा करो
काले और गोरे दोनों वर्णो का निर्माण ईश्वर नें किया है। कुदरत की बनाई हुई हर चीज खूबसूरत है श्रेष्ठ है लेकिन श्रेष्ठता के पैमाने जब से मानव नें गढना चालू किया तो गोरा रंग श्रेष्ठ और श्रेष्ठतम होता चला गया। काला रंग भगवान शनि का प्रिय रंग है क्योकि भगवान शनि लोगो के मन से कालापन दूर करके ज्ञान का उजाला फैलाते है। भगवान श्री कृष्णा, भगवान श्री राम, सिंह पर सवार महाकाली, हिमालय पर विराजमान भगवान शिव, उनके गले में लिपटा काला नाग, काले चूहे पर बैठे भगवान श्रीगणेश, सब काले ही हैं।
अगर आप ध्यान से देखें तो चारो ओर काले का ही बोलबाला है। काली अंधेरी रात में प्रकाश की केवल किरण ही टिमटिमाती है लेकिन एकछत्र राज्य काले का ही रहता है। पेन्सिल से काले किये गये ओ0एम0आर0 सीट के गोले आपको सफलता की बुलन्दी पर पहुंचा सकते है। काले कोयले से उत्पन्न उर्जा से पावरहाउस बिजली पैदा करता है जिससे हमारे घर रोशन होते है।
काली जुल्फो की घटाये हो या कजरारे नैन, पलको की चिलमन हो या काली चितवन, सारा प्रेम साहित्य ही काले वर्ण पर आधारित है। हमनें आपनें ना जानें कितनी लेख अपनें मोबाइल या कम्प्यूटर पर काले अक्षरों में ही लिख डाले होंगे। आपके घर में जितना भी सामान होगा कभी ध्यान दीजिए आधे से ज्यादा काले रंग का ही होगा चाहे हो आपका कम्प्यूटर हो, कीबोर्ड हो, माउस हो, लैपटाप या फिर टीवी की स्क्रीन सब काला ही काला। आज भी जब आप कोई वाहन खरीदनें जाते है तो पहली वरीयता काले की ही होती है क्योकि काला सदाबहार है और काले से आप बच नहीं सकते। वाहन चाहे किसी और रंग का भी ले लें लेकिन टायर उसके काले ही होंगे।
और तो और अगर आप गोरे भी है तो आपको बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगाया जाता है, गले में काला धागा पहनाया जाता है। और अगर आप पूरे काले है तो सोचिये बुरी नजर आपका क्या बिगाड लेगी।
हां अगर काले में लाख अच्छाईयां है तो कुछ बुराइयां भी है जिनसे हमेशा बचना चाहिए। अगर आप कालाबाजारी, काला धन्धा, जैसे काले कारनामों में लिप्त हैं तो निश्चित ही आपकी किस्मत काली हो जायेगी और अगर किसी मामले में फसें से तो काले कोट वाला वकील भी कुछ नहीं कर पायेगा और आपका आखिरी ठिकाना जेल की काली कोठरी ही होगी।
आजकल रंग साफ करनें का एक पूरा बाजार विकसित हो गया है। तरह तरह की फेयरनेस क्रीम, फेश क्लींजर, शावर जेल जैसे उत्पाद बाजार में मौजूद हैं जो 7 से 14 दिन में आपको गोरा बनानें का दावा करते हैं। गोरेपन का उत्पाद बनानें और बेचने वाली कम्पनियां सबसे पहले आपके अन्दर काले होनें की हीनभावना भरती है ताकि अपना उत्पाद बेचकर आपकी जेब ढीली की जा सके। लोग क्या ना खाये और क्या ना पहनें इसकी नैतिकता की दुहाई तो खूब दी जाती है लेकिन इस तरह की कम्पनियां जो मानवीय गरिमा को गिराने और जनमानस में हीनभावना भरकर अपना उल्लू सीधा करनें का काम कर रहीं है, पता नहीं क्यो उनके उत्पादों पर रोक सरकार नहीं लगाती  है?
जिन लोगों नें आज गोरेपन को श्रेष्ठता और अच्छाईयों से जोडकर रखा है और कालेपन को कमजोरी और बुराई से उनसे मैं केवल इतना ही कहूंगा कि –
अगर सफेद रंग में वफा होती तो नमक हर जख्म की दवा होती।
सुरेन्द्र श्रीवास्तव
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