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Dec 5, 2017
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किसान की खुशहाली

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खेतों में धूप चमकती
हरियाली खेतों में छायी
पीली सरसों रंग बिखरे
जैसे दुल्हन सज कर आयी
किसान पांच बजे उठ जाता
खेतों की ओर वह चल देता
मेहनत उसकी रंग ले आयी
सुनहरी खेतों में रंगत आयी
किसान मन आज है झूमा
बेटी का गौना हो जाए
इतना पैसा फसल दे जाए
गाते नाच रहे नर नारी
गौरी जब खेतों में चलती
रुनझुन उसकी पायल बजती
प्रेम रंग उस पर चढ़ जाता
खेतों में जैसे नौबत बजती
किसान खुश रहो ऐसे ही
दुआ हम सब की ऐसी.

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कविता

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