कुंडली मिलान

By | 2018-01-07T00:08:38+00:00 January 7th, 2018|लघुकथा|0 Comments

मिश्रा जी -शर्मा जी बधाई हो कुंडली मिल गई है मैं कल अपने परिवार व पुत्र को लेकर आपकी लड़की को देखने आ रहा हूं |
शर्मा जी- जी जरूर मिश्रा जी आप सादर आमंत्रित हैं|
(मिश्रा जी व शर्मा जी के परिवार में सभी ने एक दूसरे से मिलान किया वह शादी तय हो गई |)
शर्मा जी -धन्यवाद मिश्रा जी मुझे आप के जैसा संबधी पाकर बहुत प्रसन्नता महसूस हो रही है |अब हम शादी की तारीख व जो लेना देना है वह भी तय कर लेते हैं |
मिश्रा जी -हां शर्मा जी मुझे तो कुंडली मिलान की बहुत चिंता थी |इतनी लड़कियां देखी पर किसी से भी कुंडली मिलान नहीं बैठा वह मिल गई ,अब आप मुझे मेरे बेटे की हैसियत देखकर अपने आप लक्ष्मी व बहू दोनों प्रेम से दे ही दोगे |
शर्मा जी -मिश्रा जी मैंने अपनी दोनों बच्चियों का विवाह अच्छे घर में मध्यम रुप से अच्छा किया है अब तीसरी बच्ची में भी मैं जितना कर सकता हूं उतना कर लूंगा बाकी आपकी कोई बडी डिमांड है तो वह मुझे बता दे| मैं पूरी करने की कोशिश कर सकता हूं,पर वादा नही कर सकता|
मिश्रा जी- नहीं शर्मा जी अब तो कुंडली मिल गई है अब तो यही डिमांड है की शादी अच्छी हो जाए और एक डॉक्टर की कीमत क्या हैै, वह आप खुद समझते हैं |
3 महीने मौखिक रूप से शादी तय होने के बाद में मिश्रा जी का कोई फोन नही आया है| शर्मा जी के अंदर अजीब सी घबराहट तो थी फिर उन्होंने मिश्रा जी को फोन किया|
शर्मा जी- मिश्रा जी, आपका जाने के बाद कोई फोन नहीं आया तो सोचा कि अब तो आपने पंडित जी से शादी की डेट निकल वाली होगी|
मिश्रा जी -हां शर्मा जी मैं फोन करने ही वाला था| पंडित जी ने मुझे बताया कि गलत कुंडली मिलान हो गया| लड़की के गुण नहीं मिल रहे है,व उसको नाड़ी दोष भी है| अतः यह विवाह असंभव है|
शर्मा जी ने बड़े भारी मन से फोन रखा वह घर की और चल दिए |जैसे तैसे शर्मा जी का परिवार संभला |तब पता पड़ा की शर्मा जी के अन्य रिश्तेदार से मिश्रा जी ने बेटे का सौदा करके कुंडली मिलान कर लिया है|

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