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Aug 10, 2017
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कैसे दिल बहलायें

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कठिन डगर है पग में छाले , अब तो चला न जाए !
हमराही ने बांह छोड़ दी, व्यथा सही न जाए !!

सपने टूटे , ऐसे बिखरे , आंखें ठगी ठगी सी !
अपनों ही ने हमको लूटा , कैसे दिल बहलाएं !!

ग्रहण लगा है अगर चांद को , नज़रें सभी चुराये !
समय अछूत बना दे हमको , डुबकी कहाँ लगाएं !!

पावन रिश्ता मन से जोड़ा , गाँठे रेशम रेशम !
हाथ से छूटा , एसा टूटा , पकड़ नहीं हम पाये !!

झूठी कसमें , झूठे वादे , आखिर दिल टूटा है !
आंख मूंद कर चलने वाले , छलना ही बस पाएं !!

जब लिए तूलिका चित्र उकेरे , कैनवास खाली था !
झूंठी तस्वीरों को बोलो , अब हम कहाँ सजाएं !!

दिन है चुप चुप , रातें चुप सी , दामन खामोशी का !
समय ने करवट एसी बदली , चुप से काम चलाएं !!

बृज व्यास

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Article Categories:
गीत-ग़ज़ल

Comments to कैसे दिल बहलायें

  • हृदयस्पर्शी रचना !

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    Kumud vyas August 16, 2017 8:02 pm

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