कौन ?

By | 2018-01-01T22:29:04+00:00 August 21st, 2017|कविता|0 Comments

सोये हुए मेरे ज़ख्मों को ,

कौन जगा  देता है?

ठहरे हुए पानी में,

कौन कंकर फेंक देता है ?

कौन मेरे दिल को  इस तरह ,

बेक़रार सा कर जाता है ?

हलचल से मच जाती है ,

ज़हन में भी बड़ी-बड़ी लहरों सी।

सागर में तूफ़ान सा जैसे  आ जाता है।

बड़ी मुश्किल से संभल पाते है हम ,

खुद को कैसे बहलाते है हम ।

यह सिर्फ हम ही जानते हैं।

फिर ना जाने क्यों ,

हमारे शांत मन को ,

झकझोर देता है कोई ।

आँखों में दर्द का सैलाब उमड़ पड़ता है।

शब्द गम हो जाते हैं,

बस घुटी-घुटी सी आवाज़ रह जाती है।

दर्द कहीं हजारों अंगडाई लेने लगते है तभी,

कुंठा और संताप भी उपज पड़ते हैं।

आहें सर्द सी निकलती है आह बनकर ,

सदायें दे-दे कर रूह  खुदा को पुकारती ह।

आखिर क्यों हमें कोई इस कदर बेक़रार देता है कोई ?

जैसे ठहरे   हुए  शांत,सहज पानी में ,

कंकर फेंक देता है कोई?

क्यों?

 

 

 

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संक्षिप्त परिचय नाम — सौ .ओनिका सेतिया “अनु’ , शिक्षा — स्नातकोत्तर विधा — ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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