क्यों काटे वो आंसू , जो बोये पसीना ??

By | 2017-06-17T22:17:23+00:00 June 17th, 2017|कविता|0 Comments

क्यों काटे वो आंसू जो बोये पसीना ,

क्यों होता है मुश्किल सदा उसका जीना  |

वो सहता है मौसम की हर मार को भी

वो झेले है महंगाई के वार को भी ,

फसल का सही मोल उसको मिले ना

,रहे फिर भी हरदम ताने वो सीना |

है कहने को वो अन्नदाता हमारा ,

नहीं है मगर कोई उसका सहारा ,

है कर्ज़े मे डूबा वो पाँव से सर तक ,

भंवर में फंसा है क्यों उसका सफीना .

मरे खुद वो भूखा जो जग को खिलाता ,

कभी मिल ना पावे जो है मन को भाता ,

न सर पे ही पक्की कभी छत वो पाता,

कटे भारी  मुश्किल में सावन महीना |

वो सर्दी की रातें ठिठुरते गुज़ारे ,

वो गर्मी में दिनभर बहाये पसीना ,

कोई तो खबर लो अब उसकी भी देखो,

कि वो आत्महत्या कर ले कहीं ना ,

क्यों काटे वो आंसू , जो बोये पसीना ???

– मंजु सिंह

Rating: 4.0. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

About the Author:

बीस वर्षों तक हिन्दी अध्यापन किया । अध्यापन के साथ शौकिया तौर पर थोडा बहुत लेखन कार्य भी करती रही । उझे सामजिक और पारिवारिक इश्यों पर कविता कहानी लेख आदि लिखना बेहद पसन्द है।

Leave A Comment