क्षितिज के उस पार

By | 2018-01-01T22:28:34+00:00 October 26th, 2017|गीत-ग़ज़ल|0 Comments

खुलती हैं जब भी आसमां में ,

समंदर की खिड़कियाँ .

एकाकार हो एक  दूजे से ,

करता  हो ज्यों कोई मीठी बत्तियां .

क्षितिज का संगम न हो जैसे हो ,

दो  बिछड़े हुए प्रेमोयों का मिलाप .

प्रकृति के इस गूढ़ रहस्य को  भला ,

क्या समझ पाएंगे हम और आप.

प्रकृति से एकाकार होना हम जैसे साधारण ,

मनुष्यों के वश में कहाँ !

है यह  हमारी आत्मा का  द्वार ,

जीवन के रहते  नहीं  पहुँच सकते हम वहां .

 

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संक्षिप्त परिचय नाम — सौ .ओनिका सेतिया “अनु’ , शिक्षा — स्नातकोत्तर विधा — ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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