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Dec 4, 2017
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खता

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इक खता बार बार मत करना।

किसी पत्थर से प्यार मत करना।।

जानकारी में किसी सूरत में।

तुम किसी का शिकार मत करना।

सवाल के जवाब की खातिर।

बिवाद का विचार मत करना।।

कहीं नज़र न तुम्हें लग जाये।

इतना ज्यादा श्रृंगार मत करना।।

जो मुश्किल में नहीं मिलते हैं।

उन्हें अपना शुमार मत करना।।

चाहे कुछ भी हो हवा में लेकिन।

धूल,  धुँआ, गुबार मत करना।।

चाल जिसकी बदलती रहती है।

उसका एतबार मत करना।।

**जयराम राय **

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कविता

Comments to खता

  • Sundar Chitran

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    RAHUL SINGH December 5, 2017 5:11 pm

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