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Oct 10, 2017
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जंगलों का बचाव

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घने जंगलों में पंक्षीयों का बसेरा था
पंक्षीयों की चहचहाने आवाज पेड़ों पर गूजां करती थी
सभी पशु मस्ती में इधर उधर घूमा करते थे
आपस में सबका एक खुशनुमा माहौल था
हरे भरे पेड़ों का वहां झुरमुट रहता था
घने जंगलों में बुड्ढा रामदीन भी वहां रहता था
वह बेसहारा और बेचारा अकेला रहता था
तभी अचानक एक तुफान जंगल में आया
जंगल के अधिकारी ने जंगल को बेच डाला था
रामदीन चिंतित और उदास बहुत भारी था
आंखों में आंसू मनुष्य होने की ग्लानि थी उसमें
रामदीन गया अधिकारी के पास हाथ जोड़कर बैठ गया
वह अधिकारी भी कहां सुनने वाला था
अपने बच्चों के लिए अनैतिक काम तो उसको करना था
इस कार्य में बड़े बड़े अधिकारी और नेता शामिल थे
रामदीन को अधिकारी ने बुलाया था
एक छोटे से टुकड़े का लालच भी दे डाला था
रामदीन बोला मेरे आगे पीछे कोई नहीं
रिश्तों की गिनती में साहब पशु पंक्षी ही हमारे हैं
इन पेड़ों से मेरा आत्मीय का नाता है
पेड़ों को मत काटो यही विनती और नारा है
नहीं सुनी गई रामदीन की मर गया अभागा था?
सार
इससे ये सार निकलता है रामदीन समझता था अगर जंगल काट दिए जाएंगे तो भविष्य में मनुष्यों को व जीव जंतुओं को स्वच्छ हवा और पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा।।

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