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Oct 10, 2017
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जुबाँ पर बात आते आते…

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विधा- गज़ल
रद़ीफ – आते आते
ठहर गई जुबाँ पर बात आते आते ।
गहराया दिल में अँधेरा रात आते आते ।।

मचलकर दम तोड़ गए अरमान दिल में ,
लौट गई जब ख्वाबों की बारात आते आते ।

सोचता हूँ तन्हाई में कमी क्या है मेरे इश्क में ,
ठहर गए क्यों तेरे दिल में मेरे ख्यालात आते आते ।

विरान हो रही है बस्ती मेरे सुनहरे सपनों की ,
जब रूक गई खुशियों की सौगात आते आते ।

कल तक तो तू मेरी तस्वीर को दिल में सजाती थी
बहक जाते हैं क्यों तुझ तक जज्ब़ात आते आते ।

खामोश बुत की मानिंद देखता रहा “मनु” ये मंजर ,
जो हो गई जुदाई वक्त -ए- मुलाकात आते आते ।

स्वरचित
मनोज कुमार सामरिया “मनु”

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Article Categories:
गीत-ग़ज़ल

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