नमस्कार!   रचनाएँ जमा करने के लिए Login करें तेरी खामोशी · हिन्दी लेखक डॉट कॉम
Dec 3, 2017
31 Views
2 0

तेरी खामोशी

Written by

तेरी प्यासी निगाहों कि कसक यूँ झलके है।
के जैसे धरती कि बेचैनी को बस बादल ही समझे है।
यूँ खामोश लब तेरे, जो हजारों सवालात करे हैं।
ये हालात ही हैं जो तुझे बेहाल करे हैं।
खुशियाँ तो मिले हैं फिर क्यों अधूरी प्यास लिये है।

यूँ लगता है कि तेरी आँखें कोई खूबसूरत दीदार करे हैं।
यूँ मंद मंद मुस्कुराहट खामोश लबों से भी अल्फाज करे है।
इन गेसुओं की बिखरी लटें गहरे सवालात करे हैं।
ऐसा लगता है कि जैसे, बिन काजल, बिंदिया औ लाली के तू श्रृंगार करे है।
कुछ यूँ प्यारा स अहसास दिखे है, जैसे कुछ खास करे है।
खिला हो कोई फूल जैसे, तू ऐसी मुस्कान करे है।
गुले गुलशन की तरह जो मुस्कान करे है।
गर खुश है तु उन्हें अहसास तो कर।
सारे लम्हे न सही तेरे, कुछ लम्हों पे ऐतबार तो कर।
जहाँ कि खुशियाँ तेरी, ये गुलेगुलज़ार भी तेरा होगा।
ये वक़्त है, तेरा होगा ऐ मेरे हमदम, तेरे सर पे हि ताज सजेगा।

No votes yet.
Please wait...
Article Categories:
कविता

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

#वर्तनी