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Dec 4, 2017
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तेरी प्रीत में …

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तेरी प्रीत में ….

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तेरी प्रीत में ,न जाने क्या क्या हुआ

तम भी लगता मुझे ज्यो सवेरा हुआ।

 

हाल अपने दिल के बताऊ किसे

सरगम खुशी की सुनाऊ किसे

पूछते है सभी इश्क में क्या हुआ

तेरी प्रीत में …………………………

 

उजडे चमन ,उपवन से लगे

सूखा पतझण भी तो सावन सा लगे

फूल कागज की भी खुशबूआना हुआ ।

तेरी प्रीत में …………………………………

 

कभी जो भटकता था बनकर के राही

तुझे पा लिया ,मैंने मंजिल भी पायी

खोटी किस्मत में क्या क्या तमाशा हुआ।

तेरी प्रीत में न ……………………………….

 

मीठी मीठी सी कैसी मुलाकात थी

बातों बातों में गुजरी हसीं रात थी

छुप गया चाँद जाकर ,क्या कारण हुआ।

तेरी प्रीत में न ………………………….

 

मेरी जिंदगी के अँधेरे में आकर

उजाला किया मुझे अपना बनाकर

तेरी प्रीत पाकर मैं पागल हुआ।

तेरी प्रीत में ……………………….

 

मुझे यार तेरी जरूरत बड़ी है

तू ही जिंदगी ,श्वास की तू लडी है

सात जन्मो का बंधन हमारा हुआ।

तेरी प्रीत में ……………………………

 

तेरा साथ हमको है ऐसा मिला

शिकायत है भूले हैं शिकवा गिला

तू मेरी जिंदगी का सिकंदर हुआ।

तेरी प्रीत में ………………………….

 

पाकर तुझे मैं मुस्कराने लगा हूँ

गर्वित हुआ मैं इतराने लगा हूँ

हो गई तू हीर मेरी ,मैं रांझा हुआ।

 

तेरी प्रीत में न जाने क्या क्या हुआ

तम भी लगता मुझे ज्यों सबेरा हुआ।

 

राघव दुबे ‘रघु’

इटावा (उ०प्र०)

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