तेरी याद

By | 2016-11-08T18:22:57+00:00 November 8th, 2016|मुक्तक|0 Comments

जब कभी मै अंधेरो में

उजालो को ढूढता हूँ

अक्सर उन उजालो में

मै तुझे ढूढता हूँ

 

तू ना सही तेरी याद ही सही

मेरे ज़हन में बसर करती है

तेरी चूडियो की खनक आज भी

मेरे कानो में असर करती हैl

 

— दीपक अग्रवाल” हंसराज”

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