दिल की आवाज

गर मै अपने दिल के किस्से तुझको सुनाने लग जाऊ।
रो दोंगे आप जो मै दिल की बेचैनी समझाने लग जाऊ।
तेरे आसुओं से ज्यादा कीमती न है अभी मेरे दिल का दर्द।
गर सच में ये बातों को तुझे समझाने लग जाऊँ।।

तेरी मोहब्बत के अहसासों को परखने की कोशिश कर रहा हूँ।
के मोहब्बत क्या है ये समझने की कोशिश कर रहा हूँ।
काश मेरे दिल को तेरे होने का अहसास हो जाये।
के मै दिल की गहराई में तुझको खोजने फिर से लग जाऊ।।

जाने क्यों अब मुझे शक सा होता है मेरी यारी पे।
के अब असर न होता है क्या मेरी दिलदारी पे।
कि मै ही गलत हूँ ये खुद से ही जो पहचान जाऊ।
जो तू बरसे बेइंतहा जिंदगी में फिर से बारिस की तरह।
तो मै मोहब्बत के किस्से फिर से सुनाने लग जाऊ।

– सुबोध

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