दिवाली की सौगात

By | 2018-01-06T01:07:18+00:00 January 6th, 2018|कविता|0 Comments

काली अमावस की काली रात
प्रकाशित दियों की बारात
यह दिवाली की सौगात
यह दिवाली की सौगात…..

काली रातों के साये में
प्रकाशित दियों के पैमाने
जीत सत्य की सदा झूठ पर
फिर कोई क्यों नहीं माने
अनंत बार गुजरी है सदियां
फिर भी वहीं हालात …….

माँ का पूजन ओर दशहरा
रावण का चिर परिचित चेहरा
हर बरस जला घर घर में रावण
क्यों कम न होती इसकी जात़…..

गण गौरी की पूजा घर घर
रंग बिरंगे चमके हर घर
घर आँगन सब स्वच्छ हो गए
मन में सारे दोष हो गए
ईर्ष्या,द्वेष,घृणा मन मन में
ओर घृणित हालात …..

यह दिवाली की सौगात
यह दिवाली की सौगात

राघव दुबे ‘रघु’
इटावा (उ०प्र०)

No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment