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Dec 4, 2017
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दीदार -ए-सनम

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आसमान के नीचे ,चाँद तारो तले

आ मेरे यार तेरा दीदार कर लू ……

हसीं हे समा ,हसीं जिंदगी

आओ सनम तुझे प्यार कर लू …….

झिलमिल दियो का ,हो साया अनोखा

पुरवी हवा का हो आता झरोखा

इठताला तेरा यौवन ,बाहो में भर लू …..

सावन फुहारो का हो मस्त आलम

मदमस्त मचलता हो तेरा जौवन

संग तेरे बैठू दो बातें तुझसे कर लू……

तेरा ये यौवन जैसे हिमालय

सूरत तेरी है जैसे देवालय

बैठ मेरे पास ,तेरी पूजा मैं कर लू …..

कैसा ये अपना ,रिश्ता सुनहरा

संग तेरे हे जिंदगी में सबेरा

प्रभात किरण सा जहाँ में रंग भर लू….

प्यारे करने वाले खाये कसमें हमारी

दिल एक है ,एक धड़कन हमारी

जुदाई का हम कोई मंजर न जाने

ये है खुदा के गीत ओर तराने

बाहो में तेरी मैं जी लू ओर मर लू …….

तेरे ‘रघु’ का नही कोई भी ठिकाना

सनम तेरे दिल में है मेरा आसियाना

तुझे पाकर के ईबादत मैं कर लू …….

आ मेरे यार तेरा दीदार कर लू

लगा के हिय से तुझे प्यार कर लू…….

राघव दुबे ‘रघु’

इटावा (उ०प्र०)

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