दीवाने ( नज़्म )

By | 2017-11-03T19:29:45+00:00 November 3rd, 2017|गीत-ग़ज़ल|1 Comment

कभी तो  हमारी जिंदगी में सुबह होगी,

इसी उम्मीद से रात भर करवटें बदलते रहे .

मंजिल का कोई ठिकाना नहीं  था,

फिर भी  सारी उम्र  बेनाम राहों पर चलते रहे,

लाखों  तीर  जुल्मी ज़माने के भी ,

अपने नाज़ुक से  दिल -ओ-जिगर पर झेलते रहे .

और तकदीर की बेवफाई का बोझ भी ,

बेचारे !   मेरे  अरमां ,मेरे खवाब यूँ ही  उठाते रहे ,

इतना  कुछ  हो जाने पर भी ऐ खुदा !

तेरी दुनिया मैं हम दीवाने कहलाते  रहे.

 

 

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संक्षिप्त परिचय नाम — सौ .ओनिका सेतिया “अनु’ , शिक्षा — स्नातकोत्तर विधा — ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

One Comment

  1. Subodh November 4, 2017 at 6:32 pm

    bahut sahi ek no

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