नमस्कार!   रचनाएँ जमा करने के लिए Login करें नया नया प्रेम है · हिन्दी लेखक डॉट कॉम
Dec 1, 2017
31 Views
0 0

नया नया प्रेम है

Written by

नया नया प्रेम है

हमारे जिवन का ।

नये वृक्ष की डाली पर

नई पत्तीया निकली ।

पर्वतो से पिघल कर

झुमती नदीयाॅ निकली ।

शितल मधुर पवन

अंग अंग भडकाये ।

गहरे पानी से कोई

सिप से मोती लाये ।

नया नया फुल खिला है

प्रेम के उपवन का ।

नया नया प्रेम है

हमारे जिवन का

 

जब से तुमको देखा है

स्वयं को भुलाने लगे है ।

स्वप्न का नींद से

गहरा संबंध होने लगे है ।

धरा नव रंग की हो गई

गगन चमकीला हो गया ।

एक गाॅव की अप्सरा के लिये

हृदय का तट खुला हो गया ।

नया नया मीत बना

हो गया वचन बंधन का  ।

नया नया प्रेम है

हमारे जिवन का ।

” अजय वर्मा ”

 

Rating: 5.0. From 1 vote. Show votes.
Please wait...
Article Tags:
·
Article Categories:
गीत-ग़ज़ल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

#वर्तनी