पिंजरे में मैना बंधन में नारी

By | 2017-12-24T20:41:04+00:00 December 24th, 2017|कविता|0 Comments

एक मैना पिंजरे की कैदी
अतृप्त उसकी इच्छाएं
आंख से आंसू टप टप गिरते
पलकों में अभिलाषाएं
पंजों में धागे बंधे हुए
पिंजरा खुल भी जाता
उड़ उतना ही सकती
जितना मालिक चाहता
बंधन में रहकर भी
गीत सुरीले गाती
सबका मन बहलाकर
खुद भी खुश हो जाती
मैना ने छज्जे पर एक दिन
सुरीली कोयल को देखा
कुहकुह अपना प्यारा
राग सुनाती सबको
आंखों में आंसू भर मैना
कोयल से करुण स्वर में बोली
आजाद हो कितनी बहना
आसमान में उड़ सकती
चाहो तुम जिस डाल पर बैठो
नहीं बंधी सीमाएं
जाओ जियो जी भरकर
लक्ष्य को पाकर रहना

– नीरजा शर्मा

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