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Sep 30, 2017
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पुरानी चीजों का भी शौक
या उसे अपनी जरूरत भी
ईंटों पर रखे हुए बक्से
हंसते हुए आते-जाते रिश्ते
मिडिल क्लास से भी नीचे
आजकल ऐसे रहता कौन
नाक पर रखे हुए चश्मे
चश्मे से झांकते हुए जनाब
रफ्तार से बदलती दुनिया
कम्प्यूटर से रचा संसार
ये जनाब बदलने को तैयार नहीं
फितरत वही पुरानी

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Article Categories:
कविता

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