प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ

By | 2018-01-06T01:09:58+00:00 January 6th, 2018|कविता|0 Comments

प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ
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सदा बुलंदी पर परचम
लहराये भारत का
हो नतमस्तक दुनिया सारी
गुण गान गाये भारत का
जन गण मन अधिनायक का
एक नाद माँगता हूँ …
मैं प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ …

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
फूल मेरे उपवन के
मानवता सबसे बढ़कर है
यह संस्कार अंतर्मन के
द्वेष घृणा ,अपराध का
मैं नाश माँगता हूँ
प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ ……

रंग भेद की नीति नहीं है
अब यहाँ चलने बाली
फूट डाल के राज्य किया
यह नीति है बहुत पुरानी
नेताओं की ओछी हरकत का
नाश माँगता हूँ….
प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ ….

हो जाग मेरे हिंदुस्तानी
यह देश नहीं ,भारत माँ है
कुर्बान हो जा इस माटी पर
यह हर माँ का अरमा है
दुश्मन के रक्त से भारत माँ का
श़ृंगार माँगता हूँ …
प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ….

मेरे प्यारे भारत की
जग में पहचान बने
विश्व गुरु था जो पहले
फिर से अभिमान बने
ईश्वर ,अल्लाह, वाहे गुरु से
वरदान माँगता हूँ …..
प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ…

एक सूत्र में बँधा हुआ हो
मेरा हिंदुस्तान
रंग बिरंगे फूलों से जैसे
महक रहा कोई उधान
हरियाली ऋतु के पन्नों से
वसंत बहार माँगता हूँ
प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ……..

यह राम रहीमा की धरती
क्यों रक्त रंजित इसकी छाती
सिसक रही है धरती माँ
वह वार सुतो से है पाती
फिर से न हो कोई महाभारत
युद्ध विराम माँगता हूँ….
मैं अपना प्यारा हिंदुस्तान माँगता हूँ…..

राघव दुबे ‘रघु’
इटावा (उ०प्र०)

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