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Sep 18, 2017
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प्रकृति प्रेम

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कहानी ( प्रकति से प्यार)
तीन चार दिन से बुखार आ रहा था मुझे। कमरे से बाहर नहीं निकल पा रही थी कमजोरी भी महसूस हो रही थी। जैसे ही बुखार कम हुआ मन लगाने के लिए बाहर लाॅन में निकल आयी। बाहर आकर मैं आश्चर्यचकित रह गयी। सारे पंक्षी मुझे देख कर चहचहाने लगे मस्ती में झूमने लगे नाचने लगे। ऐसा लग रहा था जैसे वह सभी मुझसे बात कर रहे हैं कुछ अनबोली सी भाषा में पेड़ पौधे हमसे कह रहे हैं कहां थीं इतने दिनों से। देखा कोई हमें पानी देने वाला भी नहीं था हमारे पत्ते मुरझा गए और हम सुखने लगे हैं।।
इसी तरह पंक्षीयां जैस। कबूतर। चिड़ियाँ। एवं अन्य हमारे पास आ गए बोल रहे हैं कहां थी अब तक हमें कोई पानी देने वाला नहीं जिसमें में हम पानी पीते हैं वह सूख गया है कोई दाना देने वाला भी नहीं। उनकी सारी बातें हमें समझ आ रही थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे ये मुझे याद कर रहे थे। अगर आप इन्हें प्यार करते हैं ये भी प्यार करने लग जाते हैं।।
मेरी देवरानी के पास एक गाय थी जिससे वह बहुत प्यार करती थी। छोटी सी थी तभी से ले आयी थी उसका नाम श्यामा था।। देवरानी बड़े मनोयोग से गाए की सेवा करती थी कुछ परिस्थितियों वश गाय को गौशाला भेजना चाहा। गौशाला से कुछ व्यक्ति टेंपो लेकर आ गए। वह गाय को टेंपो में चढ़ाने लगे वह सड़क पर बैठ गयी और टस से मस नहीं हुई। उन व्यक्तियों ने डंडों से उसे मारा भी वह खड़ी तो क्या टस से मस न हुई। हारकर मेरी देवरानी उसे लेने सड़क पर गयी गाय एकदम खड़ी हो गई और अपने स्थान पर वापस आ गई गौशाला से आए व्यक्ति वापस चले गए।।
कहानी का तात्पर्य पर यह है। प्रकृति। इंसान। पशु। पंक्षी। पेड़ पौधे और हम सभी काआपस में तालमेल है। हम सब एक दूसरे को पहचानतें हैं प्यार भी करते हैं आप इन्हें प्यार करके देखिए आपको ऐसा लगेगा ये सब भी आपसे प्यार कर रहे हैं।।

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