प्रकृति से सीख

By | 2018-01-04T20:45:08+00:00 January 4th, 2018|कविता|0 Comments

सूरज का उजाला
बने जीवन हमारा
सघर्षो का मेला
दुखियों का सहारा
सूरज की तरह चमको
बनो निर्मल का सहारा

गंगा की धारा
जैसे अमृत की धारा
जहां जहां बहती
देती हरियाली जाती
बनो गंगा के जैसा
जीवन निष्प्राण में देदो

चांद की शीतलता
मनभावन होती है
जैसे फैल रही जग में
मानव की शीतलता
बन जाओ तुम भी ऐसे
चमको चांदनी जैसे

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