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Sep 1, 2017
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जरा हटके –

लघुकथा – प्रतिक्रिया

 

वे बड़े साहित्यकार थे । उनकी एक नकारात्मक प्रतिक्रिया ने बेचारे नवोदित लेखक का दम घोंट दिया था । वह विचलित हो गया था और उसे लग रहा था – सच तो कह रहे हैं हमारे माननीय । अभी उसे लिखना आता ही कहां है । दो – चार कहानियां और कविता छप जाने से क्या वह लेखक मान लिया जायेगा। समाज में उसकी इज्जत बढ़ जायेगी । नहीं …नहीं …हरगिज नही ।

सही कहते हैं वे – अभी मेरी पढ़ने की उम्र है , कैरियर बनाना है । ये कहां दीवानों की फ़ौज में खड़ा होने जा रहा हूँ मैं । सही तो कहते हैं , वे – ऊल – जलूल लिखकर समाज को भ्रमित ही तो कर रहा हूँ मैं । मेरे आधुनिक विचारों से जाग्रति तो आएगी नही , मुझे ही घर – निकाला मिल जाएगा । रोजी – रोटी के लाले पड़ जायेंगे। शादी – वादी भी नही होगी और नाकारा – निक्कमा कहाऊँगा सो अलग।

….पक्का । अब कल से नही लिखूंगा ।

यह निश्चय कर रवि करवट बदलते हुए न जाने कब सो गया । आँख लगते ही उसका विचलित मन सुनहरे सपनों में खो गया। उसने देखा – वह एक बड़े से समारोह को अपने सम्मान के बाद संबोधित कर रहा है । जन समुदाय उसके नए उपन्यास के नाम से उसे पुकार रहे हैं और उसे समाज की विसंगतियों पर लिखने वाला सच्चा पथ प्रदर्शक बता रहे हैं । उसके सम्बोधन समाप्ति के बाद पत्रकारों का झुण्ड उसे घेर रहा है और तरह तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं । अखबारों की सुर्खियों में रवि को जन नायक निरूपित किया गया है ।      अचानक वह , हड़बड़ा कर उठ बैठा ।

सपने से रवि को अपने अंतर्मन में शक्ति के संचार का एहसास हुआ । उसने निश्चय किया कि वह जीवन में कभी भी , किसी भी प्रतिक्रिया से विचलित नही होगा और अपना लेखन निरन्तर जारी रखेगा । वह हर नकारात्मक प्रतिक्रिया को भी सहजता से लेगा और बताई गई कमियों को दूर भी करेगा ।

आज वाकई रवि का सम्मान होने जा रहा था । वह् अपने निश्चय से खुश था।

– देवेंन्द्र सोनी , इटारसी

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