प्रियतम

By | 2018-01-09T12:56:54+00:00 January 9th, 2018|कविता|0 Comments

दीर्घ-संचित हृदय लिए,

मै नवयौवना ,

जाने किसे ढ़ूढ़ रही हूँ,

मधुवन बीच विचरीत करते मेरे नयन

नभ के नीलेपन को देख रहे है,

मृदु-रथ पर आएगा वो,

मेरे सपनो का राजकुमार,

देखकर हृदय मोर

नाचने को व्याकुल होगा,

नकाबपोशो की तरह

मेरे जीवन मे आन बसा है,

कलि-कुसुम सी मैं,

निहार रही उसका पथ

आएगा वो मेरा “प्रियतम”

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