प्रेमपत्र यादें

By | 2018-01-09T12:45:05+00:00 January 9th, 2018|कविता, प्रेम पत्र|0 Comments

पहले प्यार का पुराना वह खत मिला
देखते ही दिल खुश सिरहन हुई, फिर से पुराने जज्बातों का सैलाब उमड़ पड़ा|
खत पर निगाहे टिक गई,
आंखें शर्म से झुक गई,
चेहरा फिर आज लाल गुलाब हुआ |
वह भी क्या दौर था जब लिखकर सब बयां होता था,
छुपे प्यार भरे अपनेपन में ,सारा दिल का हाल बयां होता था|
रूठना मनाना एक लिफाफे के खर्च में छुपा होता था,
शब्दों में वो गहराई थी कि कलम को भी चलने में मज़ा लगता था |
प्रिय प्रियवर से हाल शुरू होता था,
दिल की गहराइयों में जज्बातो का तूफान दबा होता था |
पूछते थे जब हाले दिल एक दूसरे का तो
कशिश से दामन जुड़ा होता था ,
प्यार भरे खतों में महीनों का प्यार छुपा होता था|
बरबस ही आंखें बरस पड़ी जब पहले प्यार का खत मिला,

अब प्यार भी वहीं है जज्बात भी वहीं है
पर मेरा खत पुराने लिफाफे में कागजों के बीच कहीं फिर से छुप गया|

Rating: 4.0. From 2 votes. Show votes.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment