प्रेम पत्र

By | 2017-12-27T00:26:41+00:00 December 26th, 2017|प्रेम पत्र|0 Comments

अठखेलियां खेलें जुल्फें हमारी
प्रेमरस में मन डूबा हुआ है
याद आने लगा वो प्रेम तुम्हारा
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

अन्तर्मन में छुपी हैं भावनाएं
मन अपने अंदर खोने लगा है
प्रेम हृदय को शब्दों में उतारें
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

नदियां सागर से मिलने को तरसे
फंसाने बनने लगे हैं प्रेम के
कथानक बने तुम शरमाते
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

व्याकरण बन गया प्रेम हमारा
सौंदर्य निखारती उपमा तुम्हारी
अलंकारों से वह सजाती नीरजा को
चलो फिर से प्रेमपत्र लिख दें

#नीरजा शर्मा #

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