प्रेम

By | 2017-08-15T23:42:13+00:00 August 15th, 2017|कविता|0 Comments

प्रेम तो बस प्रेम है पर
इसके रूप अनेक है
देखो जानों और समझो तो
हर रिश्ते में प्रेम है

किसान का अपनी लहलहाती
फसल को देख खुश होना प्रेम है
जवान का अपने देश के लिए
शहीद होना प्रेम है

माँ का खुद गीले में सोकर
बच्चे को सूखे में सुलाना प्रेम है
पिता का स्वयं की जरूरतों से समझौता कर
बच्चों की जरूरत पूरी करना प्रेम है

बहन का भाई की कलाई पर
रक्षा सूत्र बांधना प्रेम है
भाई का बहन को
रक्षा का वचन देना प्रेम है

राह में चलते समय
गिरते हुए को उठाना प्रेम है
किसी के दुःख में
उसका साथ निभाना प्रेम है

बादल देखकर मयूर का
झूम कर नृत्य करना प्रेम है
नदियों का सागर से मिलने को
उत्साहित होना प्रेम है

श्री राम का शबरी के
झूठे बेर खाना प्रेम है
मीरा का विष का
प्याला पीना प्रेम है

भँवरे का रस पीने को
फूल पर बैठना भी प्रेम है
महसूस करो तो अपने चारों ओर
बस प्रेम ही प्रेम है

पूजा डालमिया

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