बंजारन

By | 2017-12-14T12:20:54+00:00 December 14th, 2017|कविता|0 Comments

 

मैं बंजारन करूँ पुकार
साहिब जी ! पधारो हमारे देश
मेरे हो वालम बंजारे
आजा अपने देश ।

पथ देख देख
नयना पथराये
मरुधर भूमि
रेत उडाये
भटकू मैं
धर जोगन भेष ।……

सौदागर बन
हृदय ले गये
रोग इश्क का
हमको दे गये
चैन बैन सब साथ गया
बचो न कछु शेष। …….

नागिन सी काली राते
वाण लगे मीठी बातें
वाट जो रहा है श़ृंगार
आओ बनावो केश ।……….

जब कोई पथिक
निकले पथ से
तेरे खत की
पूछू उससे
शायद वह दे दे
कोई संदेश।

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