बात अब इतनी ही होगी

By | 2017-03-08T20:29:56+00:00 March 8th, 2017|कविता|0 Comments

बात अब  इतनी  ही  होगी  तुमसे की  रूह में सुकून और  दिल  में  एहतिराम  रहे
बेपरवाह और  बेखौफ रहे निगाहे अब ,बस  दिल  में   जूनून  रहे

तेरे चेहरे का नूर,और लबो की मुस्कराहट यु ही बरकरार रहे
यही ख्वाइश है अब तेरी छव्वी मेरी निगाहों में क़ैद रहे

पूनम की रात में बनके महताब आँगन में तेरे चमकूँगा  ,
बेशक़ फिर ये जहान एक रात के लिए चाँद की चांदनी से महरूम रहे

मेरी ग़ज़लों को तेरे एहसासों की आदत हो चली है
कैसे रोकू कलम को जज़बातो को बयान करने से की,लिखते हुए थोड़ा महकूम रहे

देखा था खुदा के दर पर तुझे पहली मरतबा,
देख के अंदाज़-ए-अदब तेरा,सजदे में तेरे सर झुका बैठे

अब हर बसर में नज़र आता है बस तू,
अब यही दुआ है तेरा वो तिल्सिम सालो साल सलामत रहे

मिलता तो हु रोज़ तुझसे “एवज़” तुझसे मिलके थोड़ा दूर हो जाने के लिए
खुदा करे आखरी सांस तक ज़ारी ये हमारा रुसूम-ए-कुहन रहे

–  तरुण चन्द्रा

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