बिते लम्हें

By | 2017-07-27T19:51:09+00:00 July 27th, 2017|हास्य कविता|0 Comments

ज़ाने कहाँ गए ….वो दिन ,
मोटा हो रहा था ….
मैं जब दिन – ब – दिन।

मैंने भी कसमें …..न खाई थी
अधिक खाने की ……रश्में उठाई थी।

तभी एक देवी का ….दर्शन हूआ,
उसने मेरा सारा खाना …..हज़म कर लिया।

मेरे भी दिन फिरने लगे ,
वो फैलने लगी ….मैं सिकुड़ने लगा।

मेरी फितरत में.…. ये होना ही था ,
उसकी कुदरत में लिखा था …..मोटापा।

विपरीत चरित्रों ने ……आकर्षित किया,
मुद्दा दोस्ती से …..प्यार पे पहूँचा।

मैं परेशान था ….
उसके मोटापे को देखकर,
वो हैरान थी ….
मेरे स्मार्टनेस को देखकर।

उसने परपोज किया ,
I LOVE YOU कहा।

मैंने BOYCOTT किया,
उसे GOOD BY कहा ।

और अपने दुबले शरीर को ……लेकर
….खुशी खुशी चलता बना।।

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