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Sep 1, 2017
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बुजुर्ग महिला

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मैं माल बाहर निकल रही थी सीढ़ियों से नीचे उतर ही रही थी तभी मेरी नजर एक बुजुर्ग महिला पर गयी। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था साभ़ान्त परिवार की महिला हैं लेकिन वह परेशान सी इधर उधर देख रही थीं। उनके हाथ में एक थैला था थैले के अंदर कपड़े लग रहे थे। मेरे साथ मेरे पति थे मैंने सामान पकड़ा कर बोला में अभी आती हूं और उन बुजुर्ग महिला के पास जाकर पूछा आप रास्ता भटक गयी हैं मैं आपको आपके घर छोड़ देती हूँ।।

वह बुजुर्ग महिला बड़ी निरीह निगाहों से मेरी तरफ देख कर बोली बेटा मेरा कोई घर नहीं है मेरे बच्चों ने मुझे घर से निकाल दिया है मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं हैं घर भी मेरे पति का है। कातर आवाज में बोली समझ नहीं आ रहा है कहां जाँऊ पति के सामने कभी घर से नहीं निकली ऐसा कहते हुए उनकी आंखों में आंसू भर आए। अब मैं समझ नहीं पा रही थी क्या करूँ तभी गाड़ी के साथ मेरे पति बाहर आ गए। मेरा मन हुआ अभी तो इन्हें अपने घर लेकर जाऊँ फिर सोचेंगे कि क्या करना है।
मैं पति से कहते हुए डर रही थी फिर भी हिम्मत करके कहा शुक्र कि पति बुजुर्ग महिला को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए। हमने उन्हें घर लाकर खाना खिलाया। खाना देखते ही खाने पर टूट पड़ी आसपास की कोई सुध न थी बस खाए जा रही थीं और अब हम सोच रहे थे क्या करना चाहिए इनको वृध्दाआश्रम में लेकर जाएं या इनके बच्चों को समझाएं क्या आप में से कोई बता सकता है हमें क्या करना चाहिए।।

इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए क्योंकि हमारे समाज में ऐसा होता है आप सब की राय लेकर ही कहानी को पूरा करना चाहते हैं

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