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Sep 30, 2017
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मनोरम

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एक पपीहा बोले सावन का संदेशा आए
हर कली मुस्करायी उपवन बहारें आयीं

रिमझिम करती रातें रुनझुन करते दिन
ये रात गुलाबी साया और दिन सुनहरे लगते

कश्ती में बैठे हम पानी में खेला करते
आकाश में बैठे सितारे प्रेम की बरसा करते

कोयल सोती सी जागे कुह कुह कर बोले
मधुर संगीत सुनकर बादल भी झूमा करते

मैं गाऊँ एक तराना कमल खिलते हुए मुसकाये
एक बतख का जोड़ा नदियां में आकर तैरे

चांद की चंचल किरणें अपनी चमक चांदनी छोड़े
बादल की ओढनी ओढे वो देख रहा था सबकुछ

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Article Categories:
कविता

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