मुहोबत (ग़ज़ल )

By | 2017-12-24T16:00:23+00:00 December 24th, 2017|गीत-ग़ज़ल|2 Comments


                ज़माना   गुज़र गया तुम्हें याद करते ,
                तस्सवुर से तेरी तस्वीर  में रंग भरते.
               तुम्हारी  तलाश में  हम भटका किय इस कदर,
               जिंदगी में  हर मुसाफिर से तेरा पता पूछते.
               सजाये  थे जब आँखों  में  सिर्फ तेरे,
               तो और किसी को क्यों इनमें जगह देते.?
                तस्वीर से तेरी  कबतलक बहलाता जी,
                इंतज़ार  में बैठे  रहे  तेरी  हसरत-ऐ-दीदार  की करते.
                हमें रफीकों  ने   लाख समझाया मगर,
               हम ठहरा दीवाने,हम कहाँ समझते !
               तेरे   जूनून-ऐ-इश्क  में  हमें यह तोहफा मिला,
               दुश्मन ही मिले  हमें तमन्ना  दोस्त की करते.
              मेरे   अरमान भटकते रहे  मुसाफिर की तरह,
              जब तुम न मिले  इन्हें तो यह क्या करते?
              इस जिंदगी  की शाम में  अब हम हो गए तनहा                                                                        उन  चंद   लम्हों  में भी  हम तेरी ही  तमन्ना  हैं करते.

 

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संक्षिप्त परिचय नाम — सौ .ओनिका सेतिया “अनु’ , शिक्षा — स्नातकोत्तर विधा — ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

2 Comments

  1. सुबोध January 2, 2018 at 3:55 pm

    ये मुहब्बत भी बड़ी अजीब होती है
    कुछ यादें कुछ वादे सबके करीब होती है

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  2. Onika Setia January 4, 2018 at 1:03 pm

    thanks a lot sir

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