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Aug 31, 2017
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मौन-एक शक्ति

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#मौन’ की शक्ति ———
शरीर को स्वस्थ रखने के अनेक प्रयास।
मन को स्वस्थ रखने के लिए क्या??
#मौन विभिन्न तरीकों को प्रयोगों द्वारा अंतःकरण में उतर कर जानने की क्रिया है। मौन में बड़ी शक्ति है।
विचार तभी संभव हो सकता है, जब मन शांत हो, एकाग्र हो। विचारों की भीड़ हो तो किसी भी विषय पर सोच विचार हो ही नहीं सकता।पढ़ने, सोचने, लिखने, कुछ नया ढूंढने एवं आत्मचिंतन के लिए भी तो मौन आवश्यक है। अगर कोई बिना विराम दिए लगातार बोले तो क्या आपको कुछ भी समझ में आएगा?
#मौन एवं चुप्पी साधने या मुंह फुला कर किसी भी बात का जवाब न देना, दोनों में बेहद #फर्क है।दोनों एक दूसरे के विपरीत हैं। चुप्पी साधने में हमारे अंदर विचारों का कोहराम मचा होता है, हम उस समय कमजोर स्थिति में होते हैं, कोई सॉल्यूशन नहीं लेकिन मौन में हमें दिशा मिलती है।मौन जहाँ व्यक्तित्व निर्माण में सहायक है, चुप्पी आपके व्यक्तित्व के लिए हानिकारक भी है।चुप्पी मतलब अपने आप से भागना,मौन मतलब #सॉल्यूशन।
आमतौर पर हम अधिक बोलने पर ज्यादा महत्व देते हैं। हर समय बस बोलना बोलना—–
#जब हम मौन हैं तो दूसरे को अच्छी तरह समझ सकते हैं। किसी भी वार्तालाप का एक तिहाई हिस्सा #अनकहा ( non verbal) है। हमारे शरीर में दो कान, एक मुंह इसीलिए है, ताकि जितना सुने उसका आधा ही बोलें। खाना खाते समय मौन रखना अच्छी आदत है।आज भी कई लोग इस का अनुसरण करते हैं। इससे आप अच्छी तरह पूर्ण स्वाद लेकर तथा चबा चबा कर खाते हैं। जिससे ज्यादा भी नहीं खाते तथा पूर्ण सन्तुष्टि एवं शरीर भी स्वस्थ रहता है।
`#आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री #रविशंकर जी बताते हैं कि उन्हें महसूस हुआ कि वे जो कर रहे हैं, पर्याप्त नहीं है।इससे बड़े पैमाने पर बदलाव नहीं आयेगा।एक बेचैनी थी उनके हृदय में,ध्यान और शिक्षण के अलावा भी मनुष्य को कुछ चाहिए जो उसके जीवन में बड़े पैमाने पर परिवर्तन ला सके।तब श्री श्री शिमोगा (बेंगलुरू के पास एक स्थान ) गए, वहां वे दस दिन तक मौन रहे। मौन का मतलब उन्हीं के शब्दों में —
#हर सांस में प्रार्थना #मौन है!
#अनन्त में प्रेम #मौन है!
#शब्दहीन ज्ञान #मौन है!
#लक्ष्यहीन करुणा #मौन है!
#कर्ताहीन करुणा #मौन है !
#सृष्टि के संग मुस्कुराना #मौन है!
#और अंतिम दिन मौन की क्रांति खत्म हुई। जब ध्यान टूटा तो परिणाम सामने था। #सुदर्शन क्रिया यानि सांस लेने की एक विशेष प्रणाली जन्म ले चुकी थी। हम अपनी सभी भावनाओं को शब्दों में कैद नहीं किया जा सकता।इन्हें व्यक्त करने के लिए बहुत सी #मूक मुद्राओं का प्रयोग करते हैं जैसे-आलिंगन, किसी को हृदय के करीब लाने के लिए पुष्प भेंट करना आदि, ताकि भावनायें व्यक्त हो सकें। और ये मौन में भी अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम हैं।
#विपश्यना में तो मौन ही मुख्य है।यह #आत्मशुद्धि की एक वैज्ञानिक कला है।अपने को पहचानना तभी संभव है जब हम अपने भीतर की आवाज भी सुनना सीखें। दूसरे की बात सुनने कला है, लेकिन अपने #अंतःकरण की बात सुनना धर्म है।इस तरह आप स्वयं अपने व्यक्तित्व निर्माण में सहायक हो सकते हैं।अपनी दबी हुई इच्छाओं, कामनाओं को पूर्ण करने का,व्यक्त होने का अवसर देता है।
#मौन से आत्मीयता बढ़ती है। एक प्यारभरी नजर, मीठी मुस्कान, हल्का स्पर्श और मुंह से कोई बोल ना निकालें, तो भी ये खामोशी कितना कुछ कह देती है।इसके बाद अगर आप कुछ बोलेंगे तो उसका प्रभाव अच्छा होगा।
#कैसी भी बहस (विवाद)हो रही हो,चुप रहना लड़ाई का रुख बदल सकता है।【हर समय नहीं,चुप्पी साध लेना,अलग चीज है।कई बार उचित समय पर ना बोलना भी कलह का कारण बन सकता है।तथा आपको कमजोर साबित कर देता है।】आपसे लड़ने वाला व्यक्ति भी परेशान हो जायेगा, प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे रहा।विरोध जरूरी हो तो जताएं, अगर कोई आपसे सहमत नहीं है, तो तेज आवाज में ऊंचा बोलकर आपा खोने से बेहतर है, मौन रखा जाय।
#मौन रख कर देखें।अभ्यास करने से आप भीड़ में भी शांति पाना सीख सकते हैं।#मानसिक तनावरोधक तथा स्वयं को शांत,प्रसन्नचित इंसान बनाने में मदद मिलेगी।तथा जीवन में #मनचाहा लक्ष्य पा सकेंगे।हर स्थिति में ज्यादा सन्तुलित रहेंगे। बुरे वक्त में भी नकारात्मकता हावी नहीं होगी।

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स्वास्थ्य

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