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Aug 17, 2017
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राखी के दोहे

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बंधन समझ न राखिया ,बहन रही जो भेज
विश्वास अडिग आपसी ,उत्तम दान-दहेज

छाँव पलक मैं पालती,रखती तुझे सहेज
भाई निर्मल नेह को, धूप न लगती तेज

सोने मांगू बालियां ,नही मोतिया हार
भाई तेरा प्यार ही,जीवन भर उपहार

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Article Categories:
कहानी

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