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Sep 30, 2017
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राधे राधे

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लटक झटक तू जा रही
सुन गौरी सी नार
तेरी पैजनियां बजे
मन मोहे जाए
अनुपम रूप कामनी
मृगनयनी सी धार
ऐसी डोर तू खिंचती
अद्वितीय चली बयार
चांद सी उपमा दूं तुझे
सूर्य सी चमके नार
सितारे से बरस रहे
इंद्राणी बनी आज

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कविता

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