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Dec 4, 2017
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वर्तमान नेता जी की चेतना

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वर्तमान नेताजी की चेतना
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एक नेता के घर कुछ यमदूत आये और बोले-“हम यमलोक से आये हैं आपके लिए विशेष संदेश लाए है।”
नेता ने कहा-“आइये-आइये फरमाइए, क्या यमलोक में मुझे किसी संस्था का उदघाटन करना है?यमदूतों ने कहा-जी नही आपको अभी एक मिनट में मरना होगा।आपकी जिंदगी के दिन पूरे हो गए हैं ,आपके नाम के सभी नक्षत्र सो गए है।”नेता जी ने हँसकर बोला-क्षमा कीजिए इस कार्य मे मैं आपकी सहायता नही कर सकता बिना किसी विशेष कारण के मैं नहीं मर सकता, मैं या तो चुनाव में हारने पर मरूँगा या बम के हमले में मरूँगा।”यमदूतों ने गुस्से में बोला-“हम आए हैं तो खाली हाथ नहीं जाएंगे अपने स्वामी का आदेश निभाएंगे आपके शरीर से आपकी चेतना को निकालकर ले जाएंगे।”
यमदूतों को क्रोधित देख नेता मुस्कुराया और बोला-“मेरी चेतना को ले जाइए लेकिन इससे क्या होगा?”इससे आप अचेत हो जाएंगे बिना मरे चिर-निंद्रा में सो जाएंगे।”यमदूतों में से एक ने कहा।नेता बिस्तर पर सीधा लेट गया, एक यमदूत सूक्ष्म रूप धारण कर नेता के शरीर मे प्रवेश किया और भीतर चेतना को ढूढने लगा लेकिन उसे भीतर नेता का मन मिला जिसमे बिदेश-भ्रमण की कल्पनामयी तरंगें उछल रही थी।हेलीकॉप्टर में बैठकर देश के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने की उमंगे मचल रही थी।उसके बाद बुद्धि मिली- जो बिचारो के प्रबल आघातों से कट फट गई थी।बिरोधियो के लिए गालियों से भरा एक भाषण रट रही थी।आगे हिर्दय मिला-जो गरीबों की गरीबी पर रोने की कोशिश कर रहा था पर रो नही पा रहा था।भावनाओं से आँसुओ की जगह पसीना आ रहा था।यमदूत को शरीर के सभी अंग मिले पर चेतना नही मिली, उसने नेता का सारा शरीर ढूढ लिया एक-एक नस छान डाली पर चेतना का कही चिन्ह तक नही मिला।चेतना की जगह ऐसे वीरान पड़ी थी जैसे दफ्तर की छुट्टी हो जाने पर कुर्सियां खाली हो जाती है।यमदूत थककर नेता के मुख-मार्ग से बाहर लौट आया ।उसने सारा वृतान्त अपने साथियों को बताया सभी आश्चर्य में पड़ गए।नेता लेटा-लेटा मुस्कुराता रहा और जन-गण-मन गाता रहा, यमदूत लुप्त होकर यमलोक को प्रस्थान कर गए।यमदूतों के मुख से यह विचित्र घटना सुनकर यमलोक में खलबली मच गई यमराज भी चकरा गए तभी वहां नारद जी आए यमराज ने नेता की कहानी नारद को बताई, नारद जी हँसते हुए बोले-“यमराज!तुम्हारी बुद्धि की सरिता अभी दूर तक नहीं पहुँची है।तुम नही जानते की नेता की चेतना उसके शरीर मे नही, कुर्सी में रहती है”।
यमराज ने तत्काल दूत दौड़ाए दूत सीधे संसद भवन में गए जिस कुर्सी पर वह नेता बैठता था उसे उठाने लगे,नेता कुशलपूर्वक अपनी बंगला में बैठा था अचानक उसके प्राण छटपटाने लगे यमदूत कुर्सी उठाकर आकाश की ओर चलने लगे।नेता हांफते हुए लेट गया धीरे-धीरे उसके प्राण शरीर छोड़कर निकलने लगे आगे-आगे यमदूत चेतनामयी कुर्सी उठाए जा रहे थे, पीछे-पीछे नेता के प्राण चले आ रहे थे।यमलोक में नेता और कुर्सी दोनों के पहुचने पर यमराज अपने सचिव चित्रगुप्त को आदेश दिया-“नेता की चेतनाहीन जीवात्मा को किसी कोठरी में बंद करो और इस चेतनामयी कुर्सी के पुनर्जन्म का प्रबंध करो”।
–प्रिंस अभिषेक
जनता बाजार सारण(बिहार)

#मौलिक_अप्रकाशितµ

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