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Sep 12, 2017
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संतोष

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**** लघुकथा ******
****** संतोष *******
***** उदय श्री . ताम्हणे ******
रात्रि में घडी ने आठ घंटे बजाये !
बद्री प्रसाद जी ,डाइनिंग टेबल के करीब रखी कुर्सी पर विराजमान हो गए !
बहु सुनीति ने भोजन की थाली परोस दी !
बद्री प्रसाद जी ने रोटी का कोर सब्जी में डुबोया , अब मुँह में डालने ही वाले थे की सहसा रुक गए !
बद्री प्रसाद जी को बचपन से आदत है , वे भोजन की थाली में मीठा लेकर ही भोजन करते है !
” बहु ! आज थाली में मीठा रखना भूल गई ? ”
” बाबूजी ! अब आठ हजार रूपये पेंशन से , थाली में रोज गुलाब जामुन रखना सम्भव नहीं है ! ”
” क्यों भला ? मुझे तो अठ्ठाइस हजार रूपये पेंशन मिलती है ! ”
तभी कार की रोशनी से मकान जगमगा उठा ! कार की हेड लाईट भोजन की थाली पर पड़ी ,प्रकाश बद्री प्रसाद जी के चेहरे पर आया !
पल भर के लिए उनकी आँखे रोशनी से चुंधिया गई !
अब गाड़ी की लाईट बंद कर दी गई थी !
ठक . ठक .ठक . ठक . पद चाप सुनाई दे रही थी !
संतोष कमरे में दाखिल हुआ !
सुनीति कमर पर हाथ रखे खडी थी !
संतोष सारा मामला समझ गया !
” आप आ गए ! अब आप ही समझा दीजिये , बाबूजी को ! ”
” बाबूजी ! मैंने आपको बताया तो था , हमने जो नई कार खरीदी है ! उसकी इजी मंथली इंस्टालमेंट इस माह से आपके पेंशन अकाउंट से कटना है ! सो बीस हजार रुपये कट गए है ! ”
बद्री प्रसाद जी ने चीनी के डब्बे मे से चुटकी भर शक़्क़र निकालकर अपनी थाली में रखी !
सब्जी में भीगा हुआ रोटी का निवाला मुँह में रखकर वे चबाने लगे !
********

भोपाल

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लघुकथा

Comments to संतोष

  • आभार लघुकथा प्रकाशन हेतु श्रीमान !

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    Uday Tamhane September 12, 2017 8:25 pm

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